January 29, 2026


प्रमाद आत्मा का नुकसान करता है और कर्मबंध करवा देता है।......श्रुतप्रभ जी म सा।


ब्यावर - आचार्य श्री रामेश के शिष्य शासन दीपक श्री श्रुतप्रभ जी म.सा ने समता भवन मे कहा भगवान महावीर का पूर्ण जीवन अदभुत था ओर उन्होंने दीक्षा लेने के बाद पूरा ध्यान आत्मा मे हो गया शरीर का त्याग कर दिया शरीर के बारे मे कभी सोचा नही, वह सदैव राग द्वेष से मुक्त थे वह सदेश आत्मा मे रमते गये। अपनी ऊर्जा का प्रयोग आत्मा पर कर दिया था। उनकी आत्मा हर पल भावो मे जाग्रत रहा करती थी।भगवान क्या कर रहे है और हम क्या कर रहे है इस पर मनन करे।

        म सा ने कहा प्रमाद पर बताया प्रमाद आत्मा का नुकसान करता, दुसरे की टेंशन लेना सबसे बडा प्रमाद है क्योंकि हम आज चौबीस घंटे दुसरे के बारे मे ज्यादा सोचते रहते है कभी अपने बारे मे नही सोचा, कर्मबंध का कारण प्रमाद है,हम आज भोतिक कर्तव्य को पूरा कर लेते परआत्मा का कर्तव्य का पूरा करने की नही सोचते।बिना मतलब बोलना देखना सुनना बिना कारण देखना भटकना होता है। भीतर मे शांति नही होने से सारी ऊर्जा बाहर चली जाती है।

      इससे पहले श्री प्रखर श्रीजी म सा ने कहा आज व्यक्ति जीवन मे विकास चाहता नये नये क्षेत्र खोलता जाता ताकि विकास तीव्र गति है हो जाये पर वह विकास स्वंय के भीतर हो तो आत्मा समझ जाती है। तीर्थंकर देव की आदर्श आत्मा होती है जो अठारह पापो से मुक्त होती है। जो जीव अठारह पापो से युक्त होती है वह इस भव मे दुखी होते है। म सा ने कहा चोरी करने का फल खतरनाक है इसे इस भव मे खतरनाक रुप से वेदना सहन करनी पडती है। हमे इन्द्रियो का दास नही बनना नही तो जो कहती वही करना पडता है।

संघ प्रवक्ता - नोरतमल बाबेल, साधुमार्गी जैन संघ, ब्यावर।


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