नोखा - आचार्य श्री रामेश व उपाध्याय प्रवर श्री राजेश मुनि जी म सा की विषेश महतीकृपा से नोखा मे एक बार अनोखा हुआ तेरह महिना दस दिन तक एक दिन छोडकर एक दिन पारणा करना ही वर्षीतप होता है। जो भगवान ऋषभदेव ने जब,साल भर से पारणा करने के लिए इधर उधर घूमते रहे निर्दोष आहार नही मिला तेरह महिने दस दिन बाद (400 दिन) बाद आखिर मे उन्ही के पोते श्रेयांश कुमार के घर जाकर नीर आहार मिला वो भी ईशुरस का जो निर्दोश आहार था भगवान ने अपना करपात्र आगे बढाया और श्रेयांश ने ईशुरस बहराते ही पारणा कर लिया फिर चारो और खुशिया छा गयी पूरा देवलोक मे देवता खुशियाँ मनाने लगे गाने लगे (इशुरस से किया पारणा अक्षय तृतीया महान जय जय आदिनाथ भगवान) तभी से जैन समाज मे अक्षय तृतीया का महत्व है उसी दिन वर्षीतप अराधक पारणा करते हे उस समय कोई के बेला होता तो कोई कै उपवास ऐसी भरी गर्मी मे तपस्या करना वीरो का काम होता है।

साधुमार्गी जैन संघ नोखा मे 127 पारणे सम्पन्न हुए इस दौरान ब्यावर से पारणे करने वाले नवरत्न देवी/पारसमल रांका, मंजूलता/पारस औस्तवाल, चंद्रकांता/रमेश ओस्तवाल, चंचल/सुनिल बोहरा वही ब्यावर मे चंद्रकांता/नोरतमल बाबेल ने किया पारणा।
इस मौके पर नोखा गांव मे राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेन्द्र गांधी, सुरेश जी बच्छावत, नोखा अध्यक्ष कांकरिया सम्मेत समस्त पदाधिकारियों ब्यावर संघ से महामंत्री धर्मीचंद औस्तवाल, कोषाध्यक्ष निहाल चंद कोठारी, वीर पिता अशोक कोठारी वीर माता ऊषा कोठारी, वीर पिता पारसमल रांका, वीर माता नवरत्न देवी रांका, पारसमल औस्तवाल, सुनिल बोहरा सहित दस हजारो के उपर श्रावक श्रविकाओ ने वर्षीतप करने वाले अराधक की अनुमोदना करी व सुख साता पूछी। वही राष्ट्रीय अध्यक्ष पदाधिकारी ने सभी तपस्वी को मोमोन्टो देकर सम्मानित किया गया।
संघ प्रवक्ता - नोरतमल बाबेल, साधुमार्गी जैन सघ, ब्यावर