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समर्पण के बिना साधना में व्याकुलता नहीं आती : साध्वी मंजुलाश्रीजी

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बाल संघपति एवं श्री सम्मेत शिखर भाव यात्रा 16 अगस्त को, 5 से 18 वर्ष के बालक-बालिकाओं को मिलेगा संघपति बनने का अवसर।

रायपुर - आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के अंतर्गत दादाबाड़ी में अध्यात्म सार ग्रंथ का पाठ करते हुए मंगलवार को साध्वी मंजुलाश्रीजी ने कहा कि व्यक्ति को जब किसी वस्तु या इच्छा की तीव्र चाह होती है और उसे पाने के लिए अंदर छटपटाहट रहती है, वही व्याकुलता का पर्याय है। लेकिन आत्मकल्याण के लिए अपने भीतर झांकने की व्याकुलता अब तक पैदा नहीं हुई है। इसका कारण साधना में समर्पण का अभाव है।


साध्वीश्री ने हनुमानजी और माता सीता का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि एक बार हनुमानजी ने माता सीता को सिंदूर लगाते देखा। पूछने पर माता सीता ने बताया कि यह सिंदूर स्वामी के प्रति समर्पण और श्रद्धा का प्रतीक है। यह सुनकर हनुमानजी ने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया और कहा कि जब एक चुटकी सिंदूर स्वामी के प्रति समर्पण का भाव प्रकट करता है, तो मेरे रोम-रोम में प्रभु श्रीराम के प्रति समर्पण है।

उन्होंने कहा कि साधना के हर अध्याय में समर्पण का भाव दिखाई देता है। जीवन में सच्चा समर्पण लाने के लिए सबसे पहले अहंकार को छोड़ना होगा। समर्पण और कषाय एक साथ नहीं चल सकते। साधना के साथ यदि क्रोध, मान, माया और लोभ का पोषण होता रहेगा तो समर्पण का भाव मजबूत नहीं हो पाएगा।

साध्वीश्री ने कहा कि जिस लक्ष्य को प्राप्त करना है, उसके प्रति भीतर से छटपटाहट और लगन पैदा करनी होगी। साधना में समर्पण आने पर ही यह व्याकुलता उत्पन्न होगी और आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त होगा।


बच्चों को मिलेगा संघपति बनने का अवसर, 16 अगस्त को होगी सम्मेत शिखर भाव यात्रा।

आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के अंतर्गत श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट एवं श्री आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास समिति की ओर से बाल संघपति एवं श्री सम्मेत शिखर भाव यात्रा का आयोजन 16 अगस्त रविवार को किया जाएगा। यह आयोजन परम पूज्य कैवल्यधाम तीर्थ प्रेरिका प्रवर्तिनी महोदया निपुणा श्रीजी म.सा. की सुशिष्या एवं प्रवचन प्रभाविका परम पूज्य मंजुला श्रीजी महाराज साहब की निश्रा में होगा।

आयोजन के तहत सुबह 7 बजे श्री ऋषभदेव मंदिर, सदर बाजार से दादाबाड़ी परिसर में निर्मित सम्मेत शिखर की प्रतिकृति तक भव्य चतुर्विध संघ यात्रा निकाली जाएगी। यात्रा में ट्रस्टियों द्वारा विजय तिलक किया जाएगा। इसके बाद दादाबाड़ी परिसर में सम्मेत शिखर की प्रतिकृति के दर्शन एवं भाव यात्रा कराई जाएगी।

इस आयोजन की विशेषता यह है कि 5 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बालक-बालिकाओं को संघपति बनने का अवसर मिलेगा। आयोजन समिति के अनुसार यह पहल बच्चों में धर्म, संस्कार, नेतृत्व तथा सेवा-भावना की भावना जागृत करने का प्रयास है। 

यात्रा के उपरांत दादाबाड़ी परिसर में ही संघमाला का आयोजन किया जाएगा। भाव यात्रा की विधि श्री विपिनजी बागरेचा, नागदा द्वारा कराई जाएगी। आयोजकों के अनुसार इस आयोजन के माध्यम से बच्चों को जैन धर्म, तीर्थ एवं धार्मिक परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

इस अवसर पर श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय कुमार भंसाली, आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 समिति के अध्यक्ष, महासचिव मुकेश निमाणी, सह-सचिव अभिषेक गोलछा एवं कोषाध्यक्ष चिंतन मालू ने समाज के श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में सहभागी बनकर बाल संघपति एवं श्री सम्मेत शिखर भाव यात्रा का लाभ लेने की अपील की है।

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