रायपुर - नव प्रतिष्ठित जिनालय में प्रथम शनि अमावस्या के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और भक्ति के साथ श्री मुनि सुब्रत स्वामी भगवान का महापूजन, अभिषेक एवं पूजा-अर्चना कर धर्मलाभ प्राप्त किया। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ी रही और पूरे वातावरण में नवकार मंत्र, आरती एवं धार्मिक स्तुतियों की गूंज सुनाई दी।
जैन धर्म में नव प्रतिष्ठित जिनालय को अत्यंत पुण्यमय और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि प्रतिष्ठा के पश्चात आने वाली प्रथम शनि अमावस्या विशेष फलदायी होती है। इस अवसर पर भगवान की आराधना, स्नात्र पूजा, अष्टप्रकारी पूजा एवं नवकार मंत्र जाप करने से आत्मा में शांति, पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
धार्मिक विद्वानों के अनुसार अमावस्या आत्मचिंतन और अंतर्मुखी साधना का प्रतीक मानी जाती है, वहीं शनिवार संयम, गंभीरता और कर्मनिर्जरा का संदेश देता है। ऐसे में जब यह संयोग नव प्रतिष्ठित जिनालय में भगवान की आराधना के साथ जुड़ता है, तो उसका आध्यात्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
श्रद्धालुओं ने भावपूर्वक आरती, मंगल दीपक एवं पूजन कर प्रभु से सुख-शांति, सद्भाव और धर्मनिष्ठ जीवन की कामना की। मंदिर में आयोजित धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान भक्तों ने कहा कि नव प्रतिष्ठित प्रतिमा के समक्ष प्रथम विशेष तिथि पर की गई पूजा अनंत पुण्यवर्धक मानी जाती है और इससे धर्म के प्रति स्थिरता एवं आत्मबल में वृद्धि होती है।
पूरे आयोजन के दौरान जिनालय में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत वातावरण बना रहा। समाजजनों ने इसे केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मा को धर्म के निकट लाने वाला दुर्लभ और कल्याणकारी अवसर बताया।
पूजा कारक श्रीमती मोहनी बैदमुथा ने यह महापूजन संपन्न कराया। निर्मल जी ऋषभ जी पारख ने मंगल दीपक का ,आरती का लाभ राजेश कुमार पारस जी गोलछा जी ने तथा शांति दंडक का निर्मला भंडारी जी ने लाभ लिया।