हैदराबाद - हैदराबाद के त्रयनगर स्थित श्री जैन श्वेताम्बर जिनकुशलसूरिजी दादाजी बाग मंदिर, कारवान दादावाड़ी में आयोजित श्री संघ शास्ता वर्षावास–2026 के अंतर्गत 4 अगस्त 2026 को परम पूज्य गुरुदेव सूरि सम्राट, राष्ट्ररत्न, अवंती तीर्थोद्धारक, गुणायाजी तीर्थ जीर्णोद्धार प्रेरक, खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. ने अपने चातुर्मासिक मंगल प्रवचन में कहा कि मनुष्य का जीवन परिस्थितियों से नहीं, बल्कि उसके दृष्टिकोण से बनता और बिगड़ता है। संसार में सुख-दुःख, लाभ-हानि तथा मान-अपमान प्रत्येक व्यक्ति के जीवन का हिस्सा हैं, किंतु जो अपनी सोच बदल लेता है, वही हर कठिनाई को अवसर में परिवर्तित कर देता है।
गुरुदेव श्री ने कहा कि बाहरी सौंदर्य क्षणभंगुर है, जबकि श्रेष्ठ विचार ही जीवन का वास्तविक श्रृंगार हैं। जैसा मनुष्य का चिंतन होता है, वैसा ही उसका चरित्र और भविष्य निर्मित होता है। उन्होंने समझाया कि जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव ही जीवंतता का प्रमाण हैं। जिस प्रकार ईसीजी की रेखा का ऊपर-नीचे होना जीवन का संकेत है और सीधी रेखा जीवन के अंत का प्रतीक होती है, उसी प्रकार संघर्षों से घबराने के स्थान पर उन्हें आत्मविकास का माध्यम बनाना चाहिए।
उन्होंने जल का उदाहरण देते हुए कहा कि पानी स्वर्ण पात्र में हो अथवा मिट्टी के घड़े में, वह अपना स्वभाव नहीं बदलता। उसी प्रकार मनुष्य को भी परिस्थितियाँ कैसी भी हों, अपने संस्कार, संतुलन और मूल्यों को कभी नहीं छोड़ना चाहिए।
प्रवचन के दौरान गुरुदेव श्री ने महान वैज्ञानिक थॉमस एडिसन की माता का प्रेरक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि सकारात्मक दृष्टिकोण एक साधारण बालक को भी महान व्यक्तित्व बना सकता है। वहीं पूनिया श्रावक एवं मम्मण सेठ के उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने स्पष्ट किया कि वास्तविक समृद्धि धन-संपत्ति में नहीं, बल्कि संतोष, शांति और सकारात्मक चेतना में निहित है।
अपने मंगल प्रवचन के समापन में गुरुदेव श्री ने प्रेरणा देते हुए कहा कि यदि मनुष्य परिस्थितियों को बदलने का प्रयास करने के बजाय अपनी सोच बदल ले, तो शिकायत अवसर में, कठिनाई साधना में और जीवन आनंद में परिवर्तित हो सकता है। उन्होंने कहा, “परिस्थितियाँ हमें नहीं तोड़तीं, हमारा दृष्टिकोण हमें तोड़ता है। नजरिया बदलो, जीवन बदल जाएगा।”
गुरुदेव श्री के ओजस्वी एवं प्रेरणादायी प्रवचन से उपस्थित श्रद्धालुओं ने सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाकर जीवन को श्रेष्ठ बनाने, संघर्षों का साहसपूर्वक सामना करने तथा प्रत्येक परिस्थिति में आत्मविश्वास, संतुलन और संतोष बनाए रखने की प्रेरणा प्राप्त की।