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युवा बच्चों की भक्ति ने जीता दिल, रायपुर के जैन-z बच्चों के मंडल ने पाया प्रथम स्थान, राजनांदगांव का वर्धमान बालिका मंडल द्वितीय एवं विरक्ति मंडल तृतीय

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नवकार नगर स्थित श्री मुनिसुव्रत स्वामी जिनालय एवं दादाबाड़ी में दादा गुरुदेव के प्रति श्रद्धा और समर्पण भाव देखने मिला।

रायपुर - नवकार नगर स्थित श्री मुनिसुव्रत स्वामी जिनालय एवं दादाबाड़ी में आयोजित 11 दिवसीय दादा गुरुदेव एकतीसा भक्ति महोत्सव के छठवें दिन भक्ति, संस्कार और गुरु आराधना का अद्भुत संगम देखने को मिला। विशेष आकर्षण समाज के बच्चों और युवाओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। बच्चों ने जिस श्रद्धा, संवेदना और आत्मीयता के साथ दादा गुरुदेव के प्रति अपनी भक्ति प्रस्तुत की, उससे पूरा परिसर गुरु भक्ति के भावों से सराबोर हो गया।


छठवें दिन की महाभक्ति प्रतियोगिता में रायपुर के जैन-ज़ेड बच्चों के मंडल ग्रुप ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। राजनांदगांव के वर्धमान बालिका मंडल ने द्वितीय तथा विरक्ति मंडल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ वर्धमान महिला मंडल की सदस्यों द्वारा दादा गुरुदेव के एकतीसा पाठ से किया गया। इसके पश्चात विभिन्न भक्ति मंडलों ने भावपूर्ण भजनों, मधुर सुर-ताल और मनमोहक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी गुरु भक्ति अर्पित की।

बच्चों की भक्ति बनी आयोजन का विशेष आकर्षण

प्रतियोगिता के दौरान बच्चों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित श्रद्धालुओं का विशेष ध्यान आकर्षित किया। नन्हे बच्चों ने पूरे आत्मविश्वास और श्रद्धा के साथ भजनों की प्रस्तुति देते हुए यह संदेश दिया कि धर्म और संस्कार केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के जीवन और भावनाओं का भी हिस्सा हैं।


बच्चों के चेहरों पर गुरु के प्रति श्रद्धा, भक्ति के दौरान उनका उत्साह और एक साथ जयकारों से गूंजता वातावरण आयोजन की सबसे भावपूर्ण तस्वीर बन गया। बच्चों की प्रस्तुतियों को देखकर उपस्थित श्रद्धालुओं ने तालियों के साथ उनका उत्साहवर्धन किया।

आयोजकों ने कहा कि बच्चों का इस प्रकार धार्मिक आयोजनों से जुड़ना समाज के लिए अत्यंत सुखद और प्रेरणादायक है। जब बचपन में ही गुरु भक्ति, धर्म, संस्कार और अनुशासन के भाव जागृत होते हैं, तो वही संस्कार आगे चलकर समाज और जिनशासन की मजबूत नींव बनते हैं।

प्रतियोगिता के निर्णायक के रूप में संदीप जी शर्मा एवं रेखा जी राय सोनी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। निर्णायकों ने प्रतिभागी मंडलों का सुर-ताल, भाव, प्रस्तुति, अनुशासन तथा गुरु भक्ति की अभिव्यक्ति के आधार पर मूल्यांकन किया। मंच संचालन पल्लवी लुनिया ने किया।

छठवें दिन के पुरस्कार के लाभार्थी परिवार के श्री जयचंद जी, रमेशचंद जी एवं मोहनचंद जी बच्छावत, ओम शांति ज्वैलर्स परिवार रहे।

महोत्सव के दौरान दादा गुरुदेव की आराधना, एकतीसा पाठ एवं भक्ति के विभिन्न आयोजन निरंतर जारी हैं। मंदिर प्रतिष्ठा के बाद पहली बार आयोजित हो रहे इस 11 दिवसीय महोत्सव को लेकर जैन समाज में विशेष उत्साह और उमंग का वातावरण है।

400 श्रद्धालुओं ने एक साथ की दादा गुरुदेव की आरती


भक्ति प्रतियोगिता के समापन के पश्चात परिसर में एक और भावपूर्ण दृश्य देखने को मिला, जब लगभग 400 श्रद्धालुओं ने एक साथ दादा गुरुदेव की आरती एवं मंगल दीपक किया। सैकड़ों श्रद्धालुओं के हाथों में प्रज्वलित दीपों की रोशनी और सामूहिक आरती के भक्तिमय स्वरों से पूरा जिनालय परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। दादा गुरुदेव के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और भक्ति के साथ आरती अर्पित कर मंगलकामना की। यह सामूहिक आरती महोत्सव के छठवें दिन का विशेष एवं भावुक कर देने वाला क्षण रहा।

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