रायपुर - राजधानी रायपुर का ऐतिहासिक श्री दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर, मालवीय रोड इस वर्ष दशलक्षण पर्यूषण महापर्व के पावन अवसर पर अध्यात्म, तप और भक्ति के अलौकिक शिखर को छूता हुआ धर्ममय रहा। समयोपदेश वर्षायोग 2026 के अंतर्गत परम पूज्य मुनि श्री आगम सागर जी महाराज, मुनि श्री पुनीत सागर जी महाराज, ऐलक श्री धैर्य सागर जी महाराज एवं ऐलक श्री स्वागत सागर जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में दशलक्षण महापर्व का दिव्य एवं अलौकिक समापन हुआ।
समयोपदेश वर्षायोग के अध्यक्ष श्री नरेंद्र जैन गुरुकृपा एवं सकल दिगम्बर जैन समाज रायपुर के अध्यक्ष श्री संजय नायक जैन ने बताया कि पूज्य मुनि श्री आगम सागर जी महाराज की ओजस्वी देशना, सहज-सरल मार्गदर्शन और वात्सल्यमयी उपस्थिति ने श्रद्धालुओं के जीवन में धर्म का सच्चा मार्ग प्रशस्त किया। पूज्य मुनिश्री ससंघ के सानिध्य में प्रतिदिन प्रातः 5 बजे ध्यान-योग की गहन कक्षाओं से लेकर जिनेंद्र प्रभु का अभिषेक,रिद्धि-सिद्धि शांतिधारा, हृदयस्पर्शी मंगल प्रवचन, तत्त्वार्थ सूत्र की गूढ़ कक्षाएं, आचार्य भक्ति, संगीतमय महाआरती एवं रात्रिकालीन वैयावृत्ति से वातावरण दिव्य भक्ति से सराबोर रहा। पूज्य मुनिश्री की प्रेरणा से ही अनेक श्रद्धालुओं ने कठिन व्रत एवं दशलक्षण तप का मार्ग स्वीकार किया।
रविवार, 27 सितम्बर 2026 को प्रातः 07:30 बजे देव-शास्त्र-गुरु के परम सानिध्य में तपस्वियों एवं सकल दिगम्बर जैन समाज द्वारा भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया गया। धार्मिक धुनों, बैंड-बाजे एवं नृत्य के साथ रथ में श्रीजी को विराजमान कर तथा अन्य रथों में सवार तपस्वियों का नगर भ्रमण करवाकर भव्य स्वागत किया गया। शोभायात्रा में तपस्वियों के सम्मान में पूरा दिगंबर जैन समाज उमड़ पड़ा।
शोभायात्रा के उपरांत जिनेंद्र प्रभु का अभिषेक एवं अलौकिक रिद्धि-सिद्धि शांतिधारा संपन्न हुई। आज की प्रथम शांतिधारा करने का महान सौभाग्य श्री राजकुमार मोदी, श्री नवीन मोदी एवं श्री नमन मोदी (मोदी परिवार, टैगोर नगर) को प्राप्त हुआ। तत्पश्चात व्रतियों एवं तपस्वियों का द्वितीय पारणा एवं भव्य अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। आज दोपहर 1:00 बजे सकल दिगंबर जैन समाज रायपुर के तत्वावधान में सामूहिक क्षमावाणी महामहोत्सव का भव्य आयोजन हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ सकल दिगंबर जैन समाज, समयोपदेश वर्षायोग समिति 2026, श्री दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर कार्यकारिणी, महिला मंडल एवं रायपुर के समस्त जैन मंदिरों के पदाधिकारियों द्वारा चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, मुनि ससंघ के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट के साथ हुआ। तत्पश्चात ऐलक श्री धैर्यसागर जी महाराज ने सामूहिक प्रार्थना करवाई।
जैन दर्शन के अनुसार क्षमावाणी केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि आत्मा को निर्मल बनाने का महायज्ञ है। क्रोध, मान, माया और लोभ का त्याग कर 'उत्तम क्षमा' धारण करना ही दशलक्षण पर्व का वास्तविक सार है। इसी भावना के साथ समस्त जैन समाज ने एक मंच पर एकत्र होकर परस्पर हाथ जोड़कर "उत्तम क्षमा - मिच्छामि दुक्कडं" कहते हुए वर्षभर की गलतियों के लिए क्षमा याचना की और बैर-भाव भुलाकर वात्सल्य का संदेश दिया।
मुनि श्री आगम सागर जी महाराज का मंगल संदेश
धर्मसभा को संबोधित करते हुए प्रवचन में धन की पवित्रता पर जोर देते हुए कहा कि पैसा केवल कमाना पर्याप्त नहीं है, उसका माध्यम भी पवित्र और अहिंसक होना चाहिए। अहिंसक कार्यों से कमाया गया धन ही जीवन में शांति और बरकत लाता है। यदि कभी विषम परिस्थितियां आएं, तो भीख मांगकर खाना स्वीकार्य हो सकता है, लेकिन अनैतिक, गंदे या हिंसक कार्यों से पैसा कमाना कतई उचित नहीं है। ऐसे धन को अपने पास कभी नहीं रखना चाहिए।
मुनिश्री ने कहा कि मनुष्य जीवन में मान और अभिमान बहुत होता है। जो चरित्र से विचलित होता है, वही दुखी रहता है। कषायों को जीवन में स्थान न देकर देव, शास्त्र और गुरु की शरण अपनाएं तथा एक-दूसरे का सम्मान करें। बाह्य आकर्षण और भौतिकता मनुष्य को पशुता की ओर ले जाते हैं, जबकि आत्मा की गहराई और अंतरंग के संस्कार ही मनुष्य को 'परमात्मा' बनाते हैं।
मुनिश्री ने आह्वान किया कि जिससे भी आपकी बोलचाल बंद हो या पुराना मनमुटाव हो, उसे स्वयं आगे बढ़कर सिर झुकाकर सम्मानपूर्वक बुलाएं और क्षमा याचना करें। सच्चा धर्म वही है जो दिलों को जोड़ता है।
इस गरिमामय द्वितीय पारणा शोभायात्रा एवं क्षमावाणी महोत्सव के समन्वयक सकल दिगंबर जैन समाज, रायपुर तथा मुख्य आयोजक श्री जैन युवा सभा, रायपुर (छ.ग.) रहे। सकल जैन समाज एवं श्री जैन युवा सभा ने रायपुर के समस्त श्रद्धालुओं व धर्मानुरागियों का कार्यक्रम में सहभागिता हेतु हृदय से आभार व्यक्त किया।
सूचनादाता : - प्रणीत जैन (मीडिया प्रभारी)
सकल दिगम्बर जैन समाज, रायपुर (छ.ग.)
27 Sep 2026