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वाणी पर संयम रखें, अनजाने में कहे शब्द भी कर्मबंधन का कारण बनते हैं : साध्वी मंजुलाश्रीजी

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आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास -2026, गुरु पूर्णिमा पर दादाबाड़ी में चारों दादा गुरुदेव की होगी विशेष पूजा।

रायपुर - आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के अंतर्गत श्री जिनकुशलसूरि जैन दादाबाड़ी में आयोजित धर्मसभा में पूज्य साध्वी मंजुलाश्रीजी म.सा. ने वाणी, विचार और प्रवृत्ति की शुद्धता पर बल देते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी वाणी पर नियंत्रण रखना चाहिए। कोई भी बात कहने से पहले गंभीरता से विचार करना आवश्यक है, क्योंकि कटु और नकारात्मक शब्द अनजाने में भी कर्मबंधन का कारण बन जाते हैं।


उन्होंने कहा कि आज सहनशीलता लगातार कम होती जा रही है। छोटी-सी बात पर लोग आवेश में आकर अपशब्द बोल देते हैं, जबकि यह नहीं सोचते कि ऐसी वाणी से वे कितने कर्मों का बंधन कर रहे हैं। उन्होंने प्रेरणा देते हुए कहा कि मनुष्य को ऐसी मधुर वाणी बोलनी चाहिए, जिसे सुनकर लोगों के मन में प्रसन्नता उत्पन्न हो और वे उसकी बातों से प्रेरणा प्राप्त करें।

साध्वीश्री ने कहा कि किसी भी कार्य के पीछे दो महत्वपूर्ण आधार होते हैं—वृत्ति और प्रवृत्ति। वृत्ति हमारे विचारों, संकल्पों और योजनाओं का स्वरूप है, जबकि प्रवृत्ति उन विचारों को व्यवहार में उतारने की प्रक्रिया है। इसी दौरान कषायों का प्रभाव भी जुड़ जाता है, जो हमारे कर्मों और उनके परिणामों को प्रभावित करता है।

उन्होंने कहा कि केवल श्रेष्ठ विचार पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि उन्हें श्रेष्ठ आचरण में बदलना अधिक महत्वपूर्ण है। प्रवृत्ति जितनी निर्मल और शक्तिशाली होगी, परिणाम भी उतने ही श्रेष्ठ होंगे। व्यक्ति को संसार में हो रही नकारात्मक घटनाओं पर ध्यान देने के बजाय अपने आचरण को सुधारने का प्रयास करना चाहिए।

धर्म के महत्व पर प्रकाश डालते हुए साध्वी मंजुलाश्रीजी ने कहा कि जिनशासन में किसी व्यक्ति से भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। वास्तविक सावधानी केवल कर्मबंधन से बचने की होनी चाहिए। धर्म का पालन निरंतर करते रहना ही आत्मकल्याण का मार्ग है।


उन्होंने वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज कई लोगों के लिए धर्म केवल औपचारिकता बनकर रह गया है। कई बार मंदिर भी केवल आने-जाने का स्थान बन जाते हैं और धर्म जीवन का व्यवहारिक हिस्सा नहीं रह पाता। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि धर्म को केवल अनुष्ठानों तक सीमित न रखें, बल्कि उसे अपने विचारों, वाणी और व्यवहार में भी उतारें।

गुरु पूर्णिमा पर दादाबाड़ी में चारों दादा गुरुदेव की विशेष पूजा कल।

आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के अंतर्गत गुरु पूर्णिमा के अवसर पर 29 जुलाई को श्री जिनकुशलसूरि जैन दादाबाड़ी, एमजी रोड, रायपुर में चारों दादा गुरुदेव की विशेष पूजा आयोजित की जाएगी। इस अवसर पर श्रद्धालु गुरु भक्ति एवं आराधना के साथ पूजा-अर्चना करेंगे।

श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय भंसाली, चातुर्मास समिति अध्यक्ष बसंत लोढ़ा ने जैन समाज के सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर गुरु पूर्णिमा महोत्सव एवं चारों दादा गुरुदेव की पूजा का लाभ लेने की अपील की है।

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