रायपुर - श्री विमलनाथ जैन मंदिर ट्रस्ट एवं अद्भुत अनुपम आध्यात्मिक चातुर्मास समिति के तत्वावधान में बुधवार को चातुर्मास व्याख्यान के दौरान गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरु पूजन का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने वंदना एवं स्तुति के माध्यम से गुरुओं को नमन किया। वक्ताओं ने बताया कि भगवान महावीर स्वामी के प्रथम शिष्य गुरु गौतम स्वामी जी को जैन धर्म में प्रथम गुरु माना जाता है। श्री महावीर स्वामी एवं गुरु गौतम स्वामी जी से ही गुरु-शिष्य परंपरा की शुरुआत हुई थी। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने गुरु गौतम स्वामी जी की मूर्ति पर माल्यार्पण कर पूज-अर्चना किया।
इस अवसर पर परम पूज्य सिद्धांत ज्योति जी म, सा साहेब ने अपने व्याख्यान में कहा कि अगर आप भगवान के प्रति समर्पित होना चाहते हैं तो आपको अपने गुरु का सम्मान करना होगा। भाग्य खिलता है तो लक्ष्मी मिलती है और सौभाग्य मिलता है तो गुरु मिलते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर हम सभी गुरु गौतम स्वामी जी एवं अपने गुरुओं कोटिश नमन करें।
चातुर्मास समिति द्वारा निर्गोद निवारण तप का आयोजन किया जा रहा है। यह तप 2 अगस्त 2026 से नाकोड़ा भैरव सोसाइटी में परम पूज्य सिद्धांत ज्योति जी महाराजा साहेब के सानिध्य में प्रारंभ होगा।
समिति के अनुसार इस तप के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अपना नाम दर्ज कराया है। 34 दिन की इस तपस्या में 25 दिन उपवास और 09 दिन ब्यासना होगी। ब्यासना की व्यवस्था चातुर्मास समिति द्वारा श्री हिरसूरी भवन में की जाएगी। निर्गोद निवारण तप में साधक विभिन्न प्रकार के कष्ट सहकर आत्मशुद्धि करते हैं।
तप समिति में शरद जी शाह अध्यक्ष तथा श्री हर्ष वैद्य सहित अन्य सदस्य शामिल हैं।
उक्त जानकारी समिति के कार्यकारी अध्यक्ष श्री रवि डोसी एवं ललित सेठिया ने दी।