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रायपुर में मुनिश्री आगम सागर जी महाराज के सानिध्य में संपन्न हुए विविध धार्मिक अनुष्ठान, थर्ड आई क्लास और मंगल देशना; शांतिधारा व आहारचर्या के पुण्यार्जक परिवारों की रही विशेष सहभागिता।

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रायपुर - नवोदय तीर्थ श्री दिगंबर जैन आदीश्वर धाम, समयोपदेश वर्षायोग 2026 के अंतर्गत आज रविवार को श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर, मालवीय रोड में विभिन्न धार्मिक और संस्कारित कार्यक्रम संपन्न हुए। आज दिनांक 16 अगस्त को प्रातः 7:30 बजे जिनालय में मूलनायक भगवान की बेदी के समक्ष श्री जी का अभिषेक एवं शांतिधारा परम पूज्य मुनि श्री 108 आगम सागर जी महाराज के मुखारविंद से संपन्न हुई। इसके साथ ही आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का पूजन भी पूरी भक्तिभाव के साथ किया गया। 


समयोपदेश वर्षायोग 2026 के अध्यक्ष श्री नरेंद्र जैन गुरुकृपा एवं कार्यकारी अध्यक्ष श्री संजय नायक जैन ने बताया कि आज के इन धार्मिक पावन आयोजनों में शांतिधारा के पुण्यार्जक परिवार के रूप में श्री मति रजनी गर्ग, श्री विवेक-रीना, कुश गर्ग परिवार (सिविल लाइन) का सहयोग रहा। वहीं मुनिश्री की आहारचर्या के सौभाग्यार्जक परिवारों में श्री 108 आगम सागर जी महाराज हेतु श्री मति शिखा-प्रशांत जैन (कंकाली पारा), श्री 108 पुनीत सागर जी महाराज को श्री मति मोतीरानी, शोभा, अर्चना जैन (चूड़ीवाला परिवार), श्री 105 धैर्य सागर जी महाराज को श्रीमति नैना-प्रकाश भोरावत परिवार, तथा श्री 105 स्वागत सागर जी महाराज को श्रीमति संगीता-संजीव जैन (पुरी मैत्री, जैन बाड़ा) रहे। सकल दिगंबर जैन समाज ने सभी पुण्यार्जक परिवारों के पुण्य की बहुत-बहुत अनुमोदना की है।


आज प्रातः धार्मिक कक्षाओं के अंतर्गत, मुनि श्री पुनीत सागर जी महाराज द्वारा तत्त्वार्थ सूत्र का पावन अध्ययन कराया गया और मुनि श्री आगम सागर जी महाराज द्वारा छह ढाला का अध्ययन कराया गया।

दोपहर 1:00 बजे मुनि श्री पुनीत सागर जी महाराज के सानिध्य में थर्ड आई अंतर ज्ञान चक्षु की कक्षा आयोजित की गई, जिसमें समाज के 100 बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस दौरान मुनिश्री ने बच्चों को मार्गदर्शन देते हुए बताया कि आत्म की शक्ति से सब कुछ देखा जा सकता है क्योंकि अंदर की आत्मा में विराट ज्ञान होता है। मुनिश्री ने बच्चों को टीवी, मोबाइल से मन भटकाने से बचने तथा फास्ट फूड व पैकेटबंद खाद्य पदार्थों से दूर रहने की प्रेरणा दी, क्योंकि इनमें मौजूद केमिकल्स और अभक्ष्य पदार्थों का शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

दोपहर 3:00 बजे आयोजित धर्मसभा में मुनि श्री 108 पुनीत सागर जी महाराज ने अपनी मंगल देशना में फरमाया कि क्रोध, लोभ और माया का त्याग ही वास्तविक धर्म है। धर्म के स्थान पर कषाय नहीं करनी चाहिए। अंतरंग परिणामों से ही जीवन बनता है। संसार में कभी किसी के मन की इच्छा पूरी नहीं होती, तीर्थंकर भी केवल ज्ञान तक शांत रहते हैं। कषायों का त्याग करना ही सच्चा धर्म है।

सूचनादाता - प्रणीत जैन (मीडिया प्रभारी)

सकल दिगंबर जैन समाज, रायपुर

नवोदय तीर्थ श्री दिगंबर जैन आदीश्वर धाम "समयोपदेश वर्षायोग 2026"

श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर, मालवीय रोड, रायपुर

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