रायपुर - आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के अंतर्गत दादाबाड़ी में अध्यात्म सार ग्रंथ का पठन करते हुए शुक्रवार को साध्वी मंजुलाश्रीजी म.सा. ने कहा कि व्यक्ति को निरंतर अपनी योग्यता बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। जैसे-जैसे योग्यता बढ़ती है, वैसे-वैसे भीतर उदारता का भाव विकसित होता है, धर्म के प्रति रुचि जागती है और जीवन कल्याण की दिशा में आगे बढ़ता है।
साध्वीश्री ने कहा कि जीवन में यदि कोई हमारा तिरस्कार करे या हमारे साथ प्रतिकूल व्यवहार करे, तो उसे कड़वे घूंट की तरह सहन करना सीखना चाहिए। हर परिस्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय धैर्य और विवेक के साथ व्यवहार करना चाहिए। इससे व्यक्ति के भीतर सहनशीलता और आत्मसंयम का विकास होता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि हमें दूसरों के व्यवहार का भी अवलोकन करना चाहिए। लोगों के व्यवहार और परिस्थितियों से सीख लेते हुए अपने जीवन में आवश्यक सुधार करना चाहिए। दूसरों की कमियों को देखने के बजाय उनके अच्छे गुणों को ग्रहण करने की भावना रखनी चाहिए।
साध्वीश्री ने कहा कि जीवन में मौलिक गुणों का विकास होने पर पुण्य का भी अर्जन होता है। विनय, उदारता, सहनशीलता, संयम और सद्भाव जैसे गुण व्यक्ति के व्यक्तित्व को श्रेष्ठ बनाते हैं और उसे धर्म तथा आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे ले जाते हैं।
इस अवसर पर श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय कुमार भंसाली, आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 समिति के महासचिव मुकेश निमाणी, सह-सचिव अभिषेक गोलछा एवं कोषाध्यक्ष चिंतन मालू सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
बच्चों को मिलेगा संघपति बनने का अवसर, 16 अगस्त को होगी सम्मेत शिखर भाव यात्रा
आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के अंतर्गत श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट एवं श्री आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास समिति की ओर से बाल संघपति एवं श्री सम्मेत शिखर भाव यात्रा का आयोजन 16 अगस्त रविवार को किया जाएगा। यह आयोजन परम पूज्य कैवल्यधाम तीर्थ प्रेरिका प्रवर्तिनी महोदया निपुणा श्रीजी म.सा. की सुशिष्या एवं प्रवचन प्रभाविका परम पूज्य मंजुला श्रीजी महाराज साहब की निश्रा में होगा।
आयोजन के तहत सुबह 7 बजे श्री ऋषभदेव मंदिर, सदर बाजार से दादाबाड़ी परिसर में निर्मित सम्मेत शिखर की प्रतिकृति तक भव्य चतुर्विध संघ यात्रा निकाली जाएगी। यात्रा में ट्रस्टियों द्वारा विजय तिलक किया जाएगा। इसके बाद दादाबाड़ी परिसर में सम्मेत शिखर की प्रतिकृति के दर्शन एवं भाव यात्रा कराई जाएगी।
इस आयोजन की विशेषता यह है कि 5 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बालक-बालिकाओं को संघपति बनने का अवसर मिलेगा। आयोजन समिति के अनुसार यह पहल बच्चों में धर्म, संस्कार, नेतृत्व तथा सेवा-भावना की भावना जागृत करने का प्रयास है।
यात्रा के उपरांत दादाबाड़ी परिसर में ही संघमाला का आयोजन किया जाएगा। भाव यात्रा की विधि श्री विपिनजी बागरेचा, नागदा द्वारा कराई जाएगी। आयोजकों के अनुसार इस आयोजन के माध्यम से बच्चों को जैन धर्म, तीर्थ एवं धार्मिक परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।