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मन पर नियंत्रण के लिए देव, गुरु और धर्म का सानिध्य जरूरी : मुनिश्री संवेगरत्न सागर म.सा.

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रायपुर - विवेकानंद नगर स्थित श्री ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में जारी सर्वमंगलमय वर्षावास की प्रवचनमाला में शनिवार को परम पूज्य मुनिश्री संवेगरत्न सागर जी म.सा. ने मन पर नियंत्रण पाने का संदेश दिया। मुनिश्री ने कहा कि मन को नियंत्रण पसंद नहीं होता। मन जब स्वच्छंदता का आदी हो जाता है तो व्यक्ति भौतिक सुखों में ही रमण करने लगता है और आध्यात्मिक सुख से दूर होता चला जाता है।

मुनिश्री ने कहा कि मन पर नियंत्रण पाना है तो देव, गुरु और धर्म के सानिध्य में रहना होगा। जब तक स्वच्छंदता का राग और आकर्षण बना रहेगा, तब तक कुदर्शन बना रहेगा। कुदर्शन व्यक्ति के जीवन में दुख, दुर्गति और पीड़ा का कारण बनता है। भोगों में लिप्त रहना और अनुकूलताओं का लगातार पोषण करना कुदर्शन का ही स्वरूप है।


मुनिश्री ने कहा कि व्यक्ति को अपने मन का चौकीदार बनना चाहिए, क्योंकि मन के माध्यम से ही पाप की प्रक्रिया शुरू होती है। कुदर्शन के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति आने वाले भव में अनार्य देश की प्राप्ति करता है और भोगभूमि में जन्म लेता है। ऐसी स्थिति में धर्म से जुड़ना कठिन हो जाता है।

मुनिश्री न3 कहा कि धर्म से विमुख रहने पर व्यक्ति अपने भव को सुधार नहीं पाता और भवचक्र चलता रहता है। कुसंगति से जुड़ने पर व्यसन जीवन में प्रवेश करता है। नशे और गलत आदतों में फंसकर व्यक्ति दुख, दुर्गति और पीड़ा में डूब जाता है। यही नहीं, उपकार करने वालों के प्रति भी उसके मन में द्वेष का भाव पैदा होने लगता है।

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