रायपुर - नवकार नगर स्थित श्री मुनिसुव्रत स्वामी जिनालय एवं मणिधारी दादाबाड़ी में आयोजित 11 दिवसीय दादा गुरुदेव एकतीसा भक्ति महोत्सव के नवें दिन भक्ति, श्रद्धा और गुरु आराधना का अद्भुत संगम देखने को मिला। महाभक्ति प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ के विभिन्न शहरों से पहुंचे महिला एवं भक्ति मंडलों ने भावपूर्ण प्रस्तुतियों के माध्यम से दादा गुरुदेव के चरणों में अपनी भक्ति अर्पित की। कड़े मुकाबले के बाद नवलखा आराधक महिला मंडल, महासमुंद एवं दादा गुरुदेव भक्त मंडल, राजनांदगांव को संयुक्त रूप से प्रथम स्थान प्रदान किया गया, जबकि विहार सेवा ग्रुप, राजिम ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ महिला मंडल की सदस्यों द्वारा दादा गुरुदेव के एकतीसा पाठ से हुआ। इसके पश्चात विभिन्न मंडलों ने मधुर सुर-ताल, भावपूर्ण भजनों और आकर्षक प्रस्तुतियों के माध्यम से गुरु भक्ति की अनुपम छटा बिखेरी।
महिलाओं की भक्ति बनी विशेष आकर्षण
नवें दिन की भक्ति प्रस्तुतियां आयोजन का विशेष आकर्षण रहीं। विभिन्न शहरों से आए मंडलों ने अपनी प्रस्तुतियों में भक्ति के साथ गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और आत्मीय भावों को सुंदर ढंग से अभिव्यक्त किया। भजनों के मधुर स्वर और भक्तिमय वातावरण से पूरा जिनालय परिसर गुरु आराधना में सराबोर हो गया।
सुप्रसिद्ध गायक प्रसन्न चोपड़ा ने भी अपनी प्रस्तुति से कार्यक्रम में रंग जमा दिया। उनकी मधुर आवाज और भक्ति गीतों पर श्रद्धालु भावविभोर नजर आए। प्रस्तुतियों के दौरान श्रद्धालु भी भक्ति भाव में झूमते रहे। दादा गुरुदेव के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा तथा प्रत्येक प्रस्तुति के बाद उपस्थित श्रद्धालुओं ने तालियों से प्रतिभागी मंडलों का उत्साहवर्धन किया।
निर्णायकों ने किया प्रतिभागियों का मूल्यांकन
प्रतियोगिता के निर्णायक के रूप में भूपेंद्र जी एवं रेखा जी राय सोनी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। निर्णायकों ने प्रतिभागी मंडलों का मूल्यांकन सुर-ताल, भाव, प्रस्तुति, अनुशासन एवं गुरु भक्ति की अभिव्यक्ति के आधार पर किया। कार्यक्रम का मंच संचालन सुप्रसिद्ध गायक प्रसन्न चोपड़ा ने किया।
आयोजकों ने कहा कि ऐसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन समाज में भक्ति के साथ संस्कारों को भी मजबूत करते हैं। गुरु भक्ति के माध्यम से नई पीढ़ी को धर्म, संस्कार, अनुशासन एवं जिनशासन से जोड़ने का यह प्रभावी माध्यम है।
नवें दिन के पुरस्कारों के लाभार्थी गुरु भक्त परिवार रहे। पुरस्कार वितरण के दौरान विजेता मंडलों एवं प्रतिभागियों का सम्मान कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।