BREAKING

शरीर को तपाए बिना आत्मा से कर्म हटाना कठिन - माताजी

Share:

बिलासपुर में पर्व के सातवें दिन "उत्तम तप " पर तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन, अभिषेक, धार्मिक कार्यक्रम संपन्न।

बिलासपुर - दशलक्षण पर्व का सातवां दिन "उत्तम तप" का दिन रहता है। आत्म शुद्धि के लिये इच्छाओं का रोकना ही तप है। मानसिक इच्छायें साँसारिक बाहरी पदार्थों में  चक्कर लगाया करती हैं अथवा शरीर के सुख साधनों में केन्द्रिय रहती हैं। अतः शरीर को प्रमादी न बनने देने के लिये बहिरंग तप किये जाते हैं और मन की वृत्ति आत्म-मुख करने के लिये अन्तरंग तपों का विधान किया गया है। दोनों प्रकार के तप आत्म शुद्धि के अमोध साधन हैं। जैन दर्शन के दृष्टिकोण से श्रीकृष्ण और द्वारिका की कथा के माध्यम से मंचन हुवा। तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन, अभिषेक, धार्मिक कार्यक्रम संपन्न। 

जैन दर्शन के दृष्टिकोण से श्रीकृष्ण और द्वारिका की कथा के माध्यम से हुवा मंचन।

आचार्य विद्यासागर सभागार, श्री 1008 आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, क्रांतिनगर, बिलासपुर में प्रतिदिन हो रहे धार्मिक कार्यक्रमों में मंगलवार को "द्वारिका दहन और कृष्ण का मरण" पर आधारित प्रसंग के बारे में बताया गया। जैनत्व ग्रुप की प्रस्तुति अभी तक आप सभी ने हिन्दू मान्यता के अनुसार द्वारिका दहन एवं श्रीकृष्ण की मृत्यु के प्रसंग के बारे में पढ़ा, सुना और देखा होगा। लेकिन क्या आपने कभी जाना है कि जैन दर्शन के हरिवंश पुराण में द्वारिका दहन एवं श्रीकृष्ण के जीवन के इस प्रसंग का वर्णन किस प्रकार किया गया है? जैन दर्शन के दृष्टिकोण से इस अद्दुत एवं रोचक पौराणिक प्रसंग को एक अद्दुत नाटिका मंचन जहाँ जीवंत अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत हुवा। द्वारिका दहन श्रीकृष्ण के निर्वाण से पूर्व की कथा को दिखाया गया। जैन आगम एवं हरिवंश पुराण के संदर्भ में इस नाट्य का मकसद था देखिए.. सुनिए... और जानिए... जैन दर्शन के दृष्टिकोण से श्रीकृष्ण और द्वारिका की कथा। इसकी पटकथा लेखन श्रीमती मंगला जैन, निर्देशन विकास जैन ने किया और संवाद एवं संगीत रिकॉर्डिंग आकृत जैन ने की। इस अदभुत नाटिका में श्रीकृष्ण का किरदार अभिषेक जैन ने निभाया। इसी प्रकार बलदाऊ का किरदार नितिन, जरात्कुमार का किरदार संभव, दीपापिन मुनि का किरदार संयम ने निभाया। अनमोल, अनुज, ओम, आकृत ने पांडवों का रोल अदा किया। यादव कुमार के पात्र की भूमिका आशय, आरु और अवि ने निभाई। द्वारपाल की भूमिका पुनीत ने निभाई।

अनन्या, अनुष्का, सृष्टि, जिया, मनसा, सौम्या ने मनमोहक नृत्य की प्रस्तुति दी। 

तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन

पर्व के सातवें दिन "उत्तम तप " पर तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन प्रीति जैन, उषा जैन, अमृता जैन, क्षिप्रा जैन, सपना जैन, अर्पणा जैन, संध्या जैन, निशा जैन, एकता जैन, सरोज जैन ने किया। वाचन से पूर्व सभी ने अभिषेक शांति धारा किया।

प्रवचन

जैन धर्म के पर्वाधिराज दशलक्षण महापर्व सातवें दिवस "उत्तम तप धर्म" के दिन पूज्य 105 अकम्पमति माता जी एवं अचलमति माता जी ने प्रवचन में बताया कि तप का मतलब धर्म में समर्पण, जैसे सोना खदान से निकलता है तो अशुद्ध रहता है, बिना तपाए शुद्ध नहीं हो सकता। उसी तरह आत्म कल्याण के लिए उसे तपना जरूरी है अंतरंग बहिरंग तप से तप जरूरी है, बिना पात्र में दूध को तपाय घी प्राप्त नहीं होता वैसे ही शरीर को तपाए बिना आत्मा से कर्म हटाना कठिन है। मोक्ष मार्ग चलने वाले के लिए सरल और किनारे बैठे के लिए कठिन है।

बुधवार को  "16 स्वर्ग"  की भव्य प्रस्तुति

डॉ. सुप्रीत जैन एवं डॉ श्रुति जैन के निर्देशन में "16 स्वर्ग" का बुधवार को भव्य प्रस्तुति की जाएगी। जिसके कलाकार श्रीमंत सेठ प्रवीण-शकुन जैन, श्रीमंत सेठ विनोद रंजना जैन, सुकुमार-सरिता, डॉ. पी. सी. वासल-रंजनी वासल, राकेश-सुनीता,  सनत-आशा, कैलाश मंगला, प्रमोद-रेखा, अरुण-आशा, दिनेश ऊषा, सत्येंद्र निधि, पदम्-ममता होंगे।

Share: