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संसार सुखमय है या दुखमय? असली सुख बाहर नहीं, मन की अनुभूति में है : साध्वी मंजुलाश्रीजी

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विहार सेवा ग्रुप ने सम्मेत शिखर तप के तपस्वियों का कराया पारणा।

रायपुर - आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के अंतर्गत दादाबाड़ी में अध्यात्म सार ग्रंथ का पठन करते हुए सोमवार को साध्वी मंजुलाश्रीजी म.सा. ने संसार में सुख और दुख की वास्तविक अनुभूति पर चिंतन कराया। उन्होंने कहा कि संसार को केवल धन के आधार पर सुखमय या दुखमय मानना सही नहीं है। असली सुख और दुख मन की अनुभूति है और अज्ञान के कारण मनुष्य बाहरी वस्तुओं में सुख तलाशता रहता है।

साध्वीश्री ने कहा कि आज लोगों ने सुख और दुख का पैमाना धन को बना लिया है। जिसके पास अधिक पैसा है, उसे सुखी और जिसके पास कम पैसा है या जो आर्थिक संघर्ष कर रहा है, उसे दुखी मान लिया जाता है। लेकिन यदि धन ही सुख का आधार होता तो हर धनवान व्यक्ति हमेशा सुखी रहता और हर गरीब व्यक्ति हमेशा दुखी। वास्तविक जीवन में ऐसा नहीं है।

उन्होंने कहा कि पैसा जीवन की आवश्यकताओं को पूरा करने का साधन जरूर है, लेकिन वह मन की शांति और संतोष की गारंटी नहीं देता। कई बार बहुत अधिक धन-संपत्ति होने के बावजूद व्यक्ति चिंता, तनाव और बेचैनी में जीवन बिताता है, वहीं सीमित साधनों वाला व्यक्ति संतोष और प्रसन्नता के साथ जीवन जी सकता है।

साध्वी मंजुलाश्रीजी ने कहा कि हमारी समस्या संसार से ज्यादा हमारी दृष्टि की है। हम बाहर की वस्तुओं में सुख खोजते हैं और जब हमारी इच्छा पूरी होती है तो सुख का अनुभव करते हैं, जबकि इच्छा पूरी नहीं होने पर दुखी हो जाते हैं। इसी कारण मनुष्य परिस्थितियों और वस्तुओं को अपने सुख-दुख का कारण मान लेता है।

उन्होंने कहा कि जब तक व्यक्ति यह नहीं समझता कि स्थायी सुख बाहरी वस्तुओं में नहीं, बल्कि अपने भीतर है, तब तक उसकी सुख की तलाश समाप्त नहीं होगी। संसार को केवल सुखमय या दुखमय कहना पर्याप्त नहीं है। वास्तविकता यह है कि अज्ञान के कारण मनुष्य अपने भीतर मौजूद सुख और शांति को भूलकर बाहर भटक रहा है।

साध्वीश्री ने श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन की प्रेरणा देते हुए कहा कि जीवन में बाहरी परिस्थितियों को बदलने से पहले अपनी दृष्टि और सोच को बदलना जरूरी है। जब अज्ञान दूर होगा और व्यक्ति अपने भीतर झांकना शुरू करेगा, तभी उसे वास्तविक सुख, शांति और संतोष का अनुभव होगा।

इस अवसर पर श्री ऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय कुमार भंसाली, ट्रस्टी नरेश बैदसमुघा, राजेंद्र गोलछा एवं उज्ज्वल झाबक तथा आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 समिति के अध्यक्ष, महासचिव मुकेश निमाणी, सह-सचिव अभिषेक गोलछा एवं कोषाध्यक्ष चिंतन मालू सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

विहार सेवा ग्रुप ने सम्मेत शिखर तप के तपस्वियों का कराया पारणा।

आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के अंतर्गत दादाबाड़ी में चल रहे सम्मेत शिखर तप के क्रम में विहार सेवा ग्रुप द्वारा तपस्वियों के पारणा कराने का लाभ लिया गया। इस दौरान तपस्वियों ने विधिपूर्वक पारणा कर तप साधना को आगे बढ़ाया।

विहार सेवा ग्रुप के सदस्यों ने तपस्वियों की सेवा करते हुए धार्मिक आयोजन में सहभागिता निभाई। ग्रुप की ओर से विनय भंसाली, पंकज भंसाली, मनीष डागा एवं सचिन दुग्गल उपस्थित रहे।

आयोजकों ने बताया कि तपस्वियों के पारणा में सहभागी बनना भी सेवा और धर्म आराधना का महत्वपूर्ण अवसर है। इस अवसर पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहा।

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