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तीर्थंकर शासनकाल के जीवों की भिन्नता पर मुनिश्री ने दिया ज्ञानवर्धक विवेचन।

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रायपुर के नवकार नगर स्थित श्री मुनि सुब्रत स्वामी जिनालय एवं मणिधारी दादाबाड़ी में पर्यूषण पर्व की आराधना के अंतर्गत आयोजित धर्मसभा।

रायपुर - नवकार नगर स्थित श्री मुनि सुब्रत स्वामी जिनालय एवं मणिधारी दादाबाड़ी में पर्यूषण पर्व की आराधना के अंतर्गत आयोजित धर्मसभा में तीर्थंकर भगवान के शासनकाल में जीवों की प्रकृति एवं उनकी विशेषताओं पर ज्ञानवर्धक विवेचन किया गया। मुनिश्री ने व्हाइट बोर्ड पर चार्ट के माध्यम से विषय को सरल एवं रोचक ढंग से समझाया।

धर्मसभा में बताया गया कि तीर्थंकर भगवान के शासनकाल के जीवों को उनकी बुद्धि, विवेक और हृदय की सरलता-कठोरता के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों के उदाहरणों से समझा जा सकता है। जड़, प्राज्ञ, वक्र एवं ऋजु जैसे स्वभावों की व्याख्या करते हुए मुनिश्री ने बताया कि किसी व्यक्ति की केवल बुद्धिमत्ता ही नहीं, बल्कि उसका विवेक और सरल हृदय भी धर्म को ग्रहण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


उन्होंने समझाया कि जड़ वह है जिसकी बुद्धि अपेक्षाकृत कम हो और जो बात को सहजता से नहीं समझ पाता। प्राज्ञ वह है जिसकी बुद्धि अत्यंत अच्छी तथा विवेकपूर्ण हो और जो कही गई बात को शीघ्र समझ लेता है। इसी प्रकार वक्र हृदय वाला व्यक्ति सत्य को सहजता से स्वीकार नहीं करता, जबकि ऋजु हृदय वाला व्यक्ति सरल भाव से सत्य को ग्रहण एवं स्वीकार करता है।

मुनिश्री ने तीर्थंकरों के कालखंड के संदर्भ में भी इन विभिन्न प्रकार के जीवों का उल्लेख करते हुए चार्ट के माध्यम से विस्तारपूर्वक समझाया। सरल उदाहरणों और दृश्यात्मक प्रस्तुति के कारण जटिल विषय भी उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं के लिए सहज एवं बोधगम्य बन गया।

धर्मसभा में संदेश दिया गया कि ज्ञान के साथ विवेक और हृदय की सरलता का समन्वय व्यक्ति को धर्म के वास्तविक स्वरूप को समझने और जीवन में उतारने की दिशा प्रदान करता है। पर्यूषण के अवसर पर हुए इस विशेष विवेचन को श्रद्धालुओं ने अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बताया।

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