रायपुर - विवेकानंद नगर स्थित श्री ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में जारी सर्वमंगलमय वर्षावास में पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के तीसरे दिन 10 सितंबर को ज्ञान की विशेष आराधना हुई। 10 सितंबर को धर्मसभा में परम पूज्य मुनिश्री संवेगरत्न सागर जी म.सा. ने कल्पसूत्र का वांचन प्रारंभ किया। इसका क्रम 14 सितंबर तक चलेगा। कल्पसूत्र के वांचन के दौरान बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं धर्मसभा में शामिल हुए।
बैंड-बाजे के साथ उपाश्रय पहुंचा कल्पसूत्र।
पर्युषण महापर्व के तीसरे दिन सुबह चतुर्विध संघ के सानिध्य में लाभार्थी परिवार के विवेकानंद नगर स्थित निवास से कल्पसूत्र को भक्तिमय माहौल में बैंड-बाजे के साथ ज्ञानवल्लभ उपाश्रय लाया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं यात्रा में शामिल हुए। उपाश्रय पहुंचने पर लाभार्थी परिवार ने विधि-विधान और श्रद्धा के साथ मुनिश्री संवेगरत्न सागर जी म.सा. को कल्पसूत्र बोहराया। इसके बाद धर्मसभा में पांच ज्ञान की पूजा की गई।
एक दिन पहले मस्तक पर धारण कर घर ले गए थे ग्रंथ।
कल्पसूत्र के उपाश्रय पहुंचने से एक दिन पहले लाभार्थी परिवार द्वारा ग्रंथ को अपने मस्तक पर धारण कर निवास पर ले जाया गया था। यहां विधिपूर्वक ज्ञान की पूजा-अर्चना की गई। अब 14 सितंबर तक धर्मसभा में मुनिभगवंत के मुखारविंद से श्रुत का वांचन श्रावक-श्राविकाओं को सुनने का अवसर मिलेगा।
‘कल्पसूत्र महामंगलकारी, श्रवण से विघ्नों का नाश'
धर्मसभा में मुनिश्री संवेगरत्न सागर जी म.सा. ने कहा कि कल्पसूत्र महामंगलकारी ग्रंथ है। इसके श्रवण से अनेक विघ्नों का नाश होता है। चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के भवकालों का सविस्तार वर्णन कल्पसूत्र में किया गया है।
मुनिश्री ने कहा कि पूर्व में कल्पसूत्र का वाचन और श्रवण साधु-साध्वी मंडल तक सीमित था, लेकिन वर्तमान समय में गृहस्थ श्रावकों के बीच भी इसका वाचन किया जाता है। पवित्र ग्रंथ के श्रवण मात्र से प्राणियों के दुख, पाप और संताप का क्षय होता है तथा आत्मा को मोक्ष मार्ग की दिशा मिलती है। मुनिश्री ने पर्युषण महापर्व के दौरान श्रावक-श्राविकाओं से अधिक से अधिक धर्मआराधना और आत्मचिंतन करने का आह्वान किया।
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