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संवत्सरी पर आत्मचिंतन और क्षमा की आराधना, दादाबाड़ी में दिनभर हुए धार्मिक आयोजन।

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रायपुर - आत्म उत्क्रांति आध्यात्मिक चातुर्मास-2026 के अंतर्गत पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व का सबसे महत्वपूर्ण दिन संवत्सरी 15 सितंबर को दादाबाड़ी और सदर बाजार जैन मंदिर में श्रद्धा एवं भक्ति के साथ संपन्न हुआ। सुबह से शाम तक हुए विभिन्न धार्मिक आयोजनों में श्रीसंघ के श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ सहभागिता की। पौषद, बारसा सूत्र का वांचन, चैत्य परिपाटी और प्रतिक्रमण के माध्यम से श्रद्धालुओं ने आत्मचिंतन, प्रायश्चित, करुणा और क्षमा की साधना की।


पौषद और बारसा सूत्र वांचन से हुई शुरुआत

संवत्सरी के अवसर पर सुबह 5 बजे पौषद का आयोजन हुआ। इसके बाद सुबह 7.30 बजे प्रवचन के दौरान बारसा सूत्र का वांचन किया गया। बारसा सूत्र में तीर्थंकरों के चरित्र, साधु समाचारी और उत्कृष्ट जीवन जीने की प्रेरणा का समावेश होता है। इसके माध्यम से श्रद्धालुओं ने संयम और आत्मकल्याण के मार्ग को समझने का प्रयास किया।


दादाबाड़ी से सदर बाजार तक निकली चैत्य परिपाटी

सुबह 10.30 बजे दादाबाड़ी से सदर बाजार जैन मंदिर के लिए चैत्य परिपाटी निकाली गई। श्रीसंघ के श्रद्धालु धार्मिक भाव के साथ इसमें शामिल हुए और विभिन्न जिनालयों के दर्शन का लाभ लिया।

इस अवसर पर सदर बाजार मंदिर में विशेष सजावट भी की गई। मंदिर में आकर्षक रंगोली और भगवान की भव्य आंगी सजाई गई। वहीं पुरुषों द्वारा विशेष मांडला भी तैयार किया गया। भगवान के विशेष श्रृंगार और मंदिर की सजावट श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रही।

प्रतिक्रमण में किया आत्मावलोकन


दोपहर 3.30 बजे प्रतिक्रमण का आयोजन हुआ। संवत्सरी के इस महत्वपूर्ण धार्मिक क्रम में श्रद्धालुओं ने अपने जाने-अनजाने में हुए पापों के लिए प्रायश्चित किया। जीव मात्र के प्रति करुणा का भाव रखने और आपसी बैर को समाप्त कर क्षमा एवं मैत्री की भावना अपनाने का संकल्प लिया गया।

तप आराधना की भी होगी पूर्णाहुति

दादाबाड़ी में 31 अगस्त से चल रही अक्षयनिधि, समवसरण एवं कषायविजय तप की 15 दिवसीय विशेष आराधना भी आज पूर्ण हो रही है। पहले दिन 325 तपस्वियों ने तप साधना शुरू की थी। इस दौरान एकासना, प्रतिक्रमण, देववंदन और प्रतिदिन 20 माला की आराधना की गई।

सम्मेद शिखर तप के तपस्वियों की आराधना भी जारी है। दो दिनों के उपवास के बाद तपस्वियों का पारणा कराया गया है और सोमवार से लगातार तीन दिनों के उपवास की साधना चल रही है। संवत्सरी के बाद 111 तपस्वियों का पारणा होगा।

आगे भी जारी रहेगी धर्म आराधना

संवत्सरी के साथ पर्युषण महापर्व का मुख्य धार्मिक क्रम पूरा होने के बाद भी दादाबाड़ी में तप, पारणा, बहुमान और क्षमायाचना के आयोजन जारी रहेंगे।

16 सितंबर - सामूहिक पारणा

बुधवार 16 सितंबर को सुबह 7.30 बजे श्री जिनकुशल सूरी हॉल, दादाबाड़ी में सामूहिक पारणा होगा। इसका लाभ श्रीमती बसंतीदेवी, हेमंतकुमारजी-सुमनजी, पूनमचंदजी-मीतादेवी, आस्था-उमंगजी छाजेड़ (रतलाम), अनुज, पुष्पित, करण, सेजल, इशिका एवं समस्त लुंकड़ परिवार रायपुर द्वारा लिया जाएगा।

17 सितंबर - वरघोड़ा, बहुमान और सामूहिक क्षमायाचना

गुरुवार 17 सितंबर को सुबह 8 बजे तप आराधकों का वरघोड़ा निकलेगा। सुबह 9 बजे तप आराधकों का बहुमान होगा और सुबह 10 बजे सामूहिक क्षमायाचना का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद साधार्मिक वात्सल्य का आयोजन होगा, जिसका लाभ श्री उपहारजी-पूजाजी, सानवी एवं मौलिक चोपड़ा परिवार, श्री उपहार कार्ड्स, एमजी रोड रायपुर द्वारा लिया जाएगा।


18 सितंबर - सम्मेद शिखर तप आराधकों का पारणा

शुक्रवार 18 सितंबर को सुबह 9 बजे श्री जिनकुशल सूरी हॉल में सम्मेद शिखर तप आराधकों का पारणा होगा। इसका लाभ भी श्री उपहारजी-पूजाजी, सानवी एवं मौलिक चोपड़ा परिवार की ओर से लिया जाएगा।

सभी आयोजन प. पू. कैवल्यधाम तीर्थ प्रेरिका प्रवर्तिनी महोदया निपुणा श्रीजी म.सा. की विदुषी शिष्या प्रवचन प्रभाविका प. पू. मंजुलाश्रीजी म.सा. आदि ठाणा की पावन निश्रा में संपन्न हो रहे हैं। पर्युषण से संवत्सरी और अब तपस्वियों के पारणा व क्षमायाचना तक चल रही यह धर्म आराधना चातुर्मास के आध्यात्मिक वातावरण को और गहरा कर रही है।

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