हैदराबाद/रायपुर - परम पूज्य गुरुदेव सूरि सम्राट, राष्ट्ररत्न, अवंती तीर्थोद्धारक, खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा., पूज्य गणिवर्य श्री मयंकप्रभसागरजी म.सा. आदि ठाणा–9 की पावन निश्रा एवं पूज्या गणिनी प्रवरा श्री सुलोचनाश्रीजी म.सा. आदि ठाणा–34 की पावन सानिध्यता में श्री संघ शास्ता वर्षावास समिति, त्रयनगर के तत्वावधान में दिनांक 21 जुलाई 2026 को श्री जैन श्वेताम्बर पार्श्वनाथजी मंदिर, चारकमान में गुरुदेव श्री का मंगल प्रवेश संपन्न हुआ।
प्रातः 7:31 बजे गाजते-बाजते भव्य सामैया के साथ गुरुदेव श्री का मंगल प्रवेश हुआ। मंगल प्रवेश के उपरांत धर्मसभा का आयोजन किया गया। चिंतामणि पार्श्व महिला मंडल द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया। धर्मसभा में पूज्य गुरुदेव श्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि संसार में परिवर्तन प्रकृति का शाश्वत नियम है। बाहरी परिवर्तन स्वाभाविक हैं, किंतु मनुष्य को अपने मन, स्वभाव एवं जीवन-दृष्टि में सकारात्मक परिवर्तन लाकर आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर होना चाहिए। उन्होंने चातुर्मास को आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि एवं आत्मपरिवर्तन का श्रेष्ठ अवसर बताते हुए धर्म, तप एवं आराधना से जुड़ने का आह्वान किया। इस अवसर पर पूज्या साध्वी श्री प्रिय श्रेयांजनाश्रीजी म.सा. ने भी प्रवचन प्रदान कर श्रद्धालुओं को धर्ममार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा दी।
धर्मसभा के पश्चात् श्रीसंघ की ओर से स्वामीवात्सल्य का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन प्रीतेश बोहरा ने किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। यह समाचार नेमिकांतिमणि टीम द्वारा संकलित एवं प्रस्तुत किया गया है।