बिलासपुर - श्री दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर, मालवीय रोड, रायपुर में चल रहे समयोपदेश वर्षायोग 2026 के अंतर्गत दशलक्षण पर्यूषण महापर्व के दसवें दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की गहन आराधना की गई। आत्मा के निज स्वरूप में रमण करने के पावन संदेश उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म तथा 1008 श्री वासुपूज्य भगवान के मोक्ष कल्याणक दिवस के पावन अवसर पर जिनेन्द्र प्रभु की अलौकिक भक्ति, स्वर्ण कलश अभिषेक, शांतिधारा, निर्वाण लाडू समर्पण एवं पूज्य संतों का सान्निध्य अत्यंत हर्षोल्लास व श्रद्धापूर्वक संपन्न हुआ।
वर्षायोग समिति के अध्यक्ष श्री नरेंद्र जैन गुरुकृपा एवं कार्यकारी अध्यक्ष श्री संजय नायक जैन ने बताया कि उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के शुभ अवसर पर जिनेन्द्र देव का प्रथम चार इन्द्रों के रूप में स्वर्ण कलशों से अभिषेक करने का सौभाग्य निम्नलिखित पुण्यात्मा परिवारों को प्राप्त हुआ प्रथम इन्द्र श्री अभिषेक जैन, श्रीमती शालिनी जैन, सर्वम, सुलेखा जैन द्वितीय इन्द्र श्री आशीष जैन, श्रीमती दीपा जैन, अक्षत जैन,तृतीय इन्द्र श्री धर्मचंद जी गंगवाल, श्रीमती ऊषा गंगवाल (रायपुर),चतुर्थ इन्द्र श्री मयंक जैन, श्रीमती पुष्पा शीलचंद्र जैन, श्री चिराग जैन, श्री पराग जैन
आज विश्व शांति एवं सर्वजन कल्याण हेतु चमत्कारिक रिद्धि-सिद्धि शांतिधारा करने का सौभाग्य श्री भरत जैन भोरावत, श्री हर्षवर्धन जैन एवं श्री प्रिंस जैन (भोरावत परिवार) को प्राप्त हुआ साथ ही मूलनायक भगवान की प्रथम शांतिधारा त्रिकाल चौबीसी में भगवान विराजमान करने वाले श्री अखिल जैन (मोनू), श्रीमती कल्पना जैन (मामी), श्री अर्पण जैन एवं श्री अनिक जैन द्वारा की गई। मूलनायक भगवान की द्वितीय शांतिधारा का सौभाग्य श्रीमती सरोज कस्तूरे, श्री जयंत कस्तूरे, श्रीमती शिल्पा कस्तूरे, श्री तेजस कस्तूरे, श्री श्रेयांश कस्तूरे, श्री विजय जैन, श्रीमती छाया कस्तूरे, आर्या कस्तूरे, प्रज्ञा कस्तूरे (कस्तूरे परिवार) को मिला।
1008 श्री वासुपूज्य भगवान के मोक्ष कल्याणक दिवस पर निर्वाण लाडू समर्पित करने का महान सौभाग्य श्री नरेंद्र जैन एवं श्री योगेंद्र जैन (गुरुकृपा परिवार) को प्राप्त हुआ। प्रभु की महाआरती एवं फूलमाला समर्पित करने का सौभाग्य श्री विजय कुमार नायक, श्री अजय कुमार नायक, श्री संजय नायक एवं श्री विपुल नायक (नायक परिवार) को मिला। आज के विशेष द्रव्यदान का सौभाग्य श्रीमती लता देवी जैन एवं श्री लक्ष्मीकांत जैन को प्राप्त हुआ।
पूज्य मुनि ससंघ की विशुद्ध आहारचर्या एवं तप साधना
सकल दिगंबर जैन समाज रायपुर के सौभाग्य से आज पूज्य मुनि ससंघ की विशुद्ध आहारचर्या एवं तप साधना संपन्न हुई जिसमें परम पूज्य मुनि श्री 108 आगम सागर जी महाराज श्रीमती ममता जैन, श्रीमती किरण जैन, हर्ष जैन (निज निवास - जैन बाड़ा), परम पूज्य मुनि श्री 108 पुनीत सागर जी महाराज आज निर्जला उपवास व व्रत, परम पूज्य ऐलक श्री 105 धैर्य सागर जी महाराज ब्रह्मचारिणी रोशनी दीदी, शौर्य दीदी (बाबूलाल टॉकीज परिवार, मंदिर जी कार्यालय के सामने),परम पूज्य ऐलक श्री 105 स्वागत सागर जी महाराज: आज निर्जला उपवास व व्रत
धर्मसभा को संबोधित करते हुए पूज्य मुनि श्री 108 पुनीत सागर जी महाराज ने अपनी मंगल देशना प्रवचन में बताया कि ब्रह्म का अर्थ आत्मा होता है। जो आत्मा में रमण करता है, वही ब्रह्मचर्य का पालन करता है। जिसने शरीर के सुख को ही आत्मा मान लिया है, वह तीनों कालों में संसार चक्र से मुक्त नहीं हो सकता। जिसे आत्मा का ज्ञान नहीं है, वह बाह्य वस्तुओं में सुख खोजता है और अंतरंग में प्रवेश नहीं कर पाता।
मुनि श्री ने आत्मा के तीन प्रकार - बहिरात्मा, अंतरात्मा और परमात्मा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जो शरीर को ही आत्मा मानता है वह बहिरात्मा है, जो परमात्मा का चिंतन करता है वह अंतरात्मा है और जो अंतरंग से आत्मा का कल्याण कर ले वह परमात्मा बन जाता है। जैनागम में निर्दोष ब्रह्मचर्य व्रत को महान बताया गया है। मुनि श्री ने कहा कि जो पाप से डरता है और अपने चरित्र की रक्षा करता है, वही सन्मार्ग पर चलता है। ब्रह्म में आचरण करने का नाम ही ब्रह्मचर्य है।
धर्मसभा में पूज्य मुनि श्री 108 आगम सागर जी महाराज ने अपनी मंगल देशना में बताया कि शील व्रत, पश्चाताप एवं सदाचार का मर्म समझाते हुए कहा कि यदि जीवन में कर्म के उदय से कोई गलती हो जाए तो उसे स्वीकार करना चाहिए, क्योंकि गलती स्वीकार करने और पश्चाताप करने से पाप का भार कम होता है। जो व्यक्ति अपने अपराध को अपराध नहीं मानता, उसका कभी कल्याण नहीं हो सकता। मुनि श्री ने कहा कि पश्चाताप के भाव से आसपास का वातावरण शुद्ध हो जाता है और लोग पुनः विश्वास करने लगते हैं। दाम्पत्य जीवन में जो पति-पत्नी एक-दूसरे के प्रति पूर्ण समर्पण और विश्वास रखते हैं तथा शील व्रत का पालन करते हैं, उनका जीवन धन्य हो जाता है। जिनके जीवन में चरित्र का दाग लग जाता है, वे दर्पण के सामने खड़े होकर अपनी ही नजरों में गिर जाते हैं। इसलिए दाग लगाकर जीने से अच्छा है कि सर उठाकर जिया जाए। पुरानी भूलों को बिसारकर आगे की राह को सरल, पवित्र और धर्ममय बनाएं। दशलक्षण धर्म प्रतिदिन और प्रतिपल जीने के लिए हैं।
वर्षायोग समिति ने आगामी धार्मिक आयोजनों की जानकारी देते हुए बताया दिनांक 26 सितम्बर 2026 (शनिवार) - व्रतियों का सम्मान एवं पारणा का आयोजन किया गया है जिसमें प्रातः 06:30 बजे: जिनेन्द्र देव का अभिषेक,प्रातः 07:30 बजे: दशलक्षण पर्व के व्रतियों एवं तपस्वियों का भव्य सम्मान,प्रातः 08:00 बजे: व्रतियों का निष्ठापन एवं पारणा,प्रातः 09:00 बजे: पूज्य मुनि श्री आगम सागर जी महाराज का मंगल प्रवचन, प्रातः 10:00 बजे: पूज्य मुनि ससंघ की आहारचर्या,
साथ ही दिनांक 27 सितम्बर 2026 (रविवार) - सकल दिगम्बर जैन समाज क्षमावाणी पर्व पर प्रातः 07:00 बजे जिनेन्द्र अभिषेक, नित्यमह पूजन एवं क्षमावाणी पूजन, दोपहर 01:00 बजे: परम पूज्य आचार्य श्री का पूजन,सायंकाल 04:30 बजे: सकल दिगम्बर जैन समाज का भव्य क्षमावाणी कार्यक्रम, वात्सल्य मिलन समारोह एवं प्रीतिभोज
वर्षायोग समिति एवं सकल दिगंबर जैन समाज रायपुर के पदाधिकारियों ने सभी पुण्यात्मा एवं तपस्वी परिवारों के इस महान कार्य की बारंबार अनुमोदना करते हुए समस्त धर्मानुरागी बंधुओं से इन सभी पावन आयोजनों में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर धर्मलाभ अर्जित करने की अपील की है।
सूचनादाता - प्रणीत जैन (मीडिया प्रभारी)
श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर, मालवीय रोड, रायपुर